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Manas Ank
muhabbat ke alaava ab KHuda phir kaun aayega
muhabbat ke alaava ab KHuda phir kaun aayega | मुहब्बत के अलावा अब ख़ुदा फिर कौन आएगा
- Manas Ank
मुहब्बत
के
अलावा
अब
ख़ुदा
फिर
कौन
आएगा
अब
उसकी
इस
जगह
पर
दूसरा
फिर
कौन
आएगा
अकेला
हूँ
अकेला
था
अकेला
ही
रहूँगा
मैं
मेरे
ग़म
में
उदासी
के
सिवा
फिर
कौन
आएगा
- Manas Ank
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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जिसकी
ख़ातिर
कितनी
रातें
सुलगाई
जिसके
दुख
में
दिल
जाने
क्यूँ
रोता
है
इक
दिन
हम
सेे
पूछ
रही
थी
वो
लड़की
प्यार
में
कोई
पागल
कैसे
होता
है
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Ritesh Rajwada
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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तू
भी
कब
मेरे
मुताबिक
मुझे
दुख
दे
पाया
किस
ने
भरना
था
ये
पैमाना
अगर
ख़ाली
था
एक
दुख
ये
कि
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
है
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
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Tehzeeb Hafi
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और
भी
दुख
हैं
ज़माने
में
मोहब्बत
के
सिवा
राहतें
और
भी
हैं
वस्ल
की
राहत
के
सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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उदासी
चल
कहीं
चलते
हैं
दोनों
पिएँगे
चाय
और
बातें
करेंगे
Gaurav Singh
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इस
कदर
मत
उदास
हो
जैसे
ये
मोहब्बत
का
आख़िरी
दिन
है
Idris Babar
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अब
अकेला
रहूँगा
मैं
कैसे
ज़िंदगी
दोस्तों
में
गुज़री
है
Manas Ank
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कह
रही
सिलवटें
ये
बिस्तर
की
रात
तो
करवटों
में
गुज़री
है
Manas Ank
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नहीं
चलती
कभी
मर्ज़ी
हमारी
बताओ
तो
ज़रा
ग़लती
हमारी
जहाँ
पर
तैरने
को
कह
रहे
हो
वहीं
पर
डूबी
है
कश्ती
हमारी
यहाँ
भौंरा
कली
को
खा
गया
है
कि
जो'कर
से
मरी
रानी
हमारी
बड़ी
मुश्किल
से
ही
हमको
मिली
थी
उठा
ली
आपने
कुर्सी
हमारी
त'अल्लुक़
आपका
हम
सेे
नहीं
जब
तो
क्यूँ
फिर
चाटते
जूती
हमारी
कुआँ
कब
आएगा
इस
प्यासे
के
पास
कि
रस्ता
देखती
खिड़की
हमारी
बग़ीचे
पर
तुम्हें
इतना
गुमाँ
है
रखो
तुम
फूल
है
तितली
हमारी
बड़ा
महँगा
बताते
थे
हमें
तुम
लगी
बोली
यहाँ
सस्ती
हमारी
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Manas Ank
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यहाँ
पर
वो
कितना
अकेला
हुआ
है
किसी
हाथ
का
जो
खिलौना
हुआ
है
जिसे
आप
दिल
में
बसाए
हुए
हो
वो
दिल
से
किसी
के
निकाला
हुआ
है
कि
बचपन
से
लड़के
के
नख़रे
उठाए
जवानी
में
लड़का
नकारा
हुआ
है
गुलाबों
को
देकर
हँसाता
रहा
मैं
अब
उसका
ही
कमरा
बग़ीचा
हुआ
है
जिसे
प्यार
के
ख़त
की
ख़ातिर
थे
लाए
वही
अब
शगुन
का
लिफ़ाफ़ा
हुआ
है
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Manas Ank
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तो
मैं
क्यूँ
दूरबीन
लेता
फिर
जो
तू
आँखों
को
छीन
लेता
फिर
Manas Ank
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