khushi hai ye ki dar-o-baam bach ga.e ghar ke | ख़ुशी है ये कि दर-ओ-बाम बच गए घर के

  - Harsh Kumar Bhatnagar
ख़ुशीहैयेकिदर-ओ-बामबचगएघरके
मरेहैंलोगमगरकाफ़ीमेरेलश्करके
ख़रीदताहैवोग़मभीउधारलोगोंसे
जोकामआताहैमहफ़िलमेंउससुख़न-वरके
सुनाथायेकिमोहब्बतमेंकोईमरतानहीं
वोसबभीटूटगएजोबनेथेपत्थरके
मिलेगाकैसेनिशाँमेरेक़त्लकातुमको
दबीहैलाशमिरीबीचमेंसमुंदरके
मैंरोज़आताहूँघरख़ालीहाथलेकरजब
मैंआइनाभीनहींदेखपाताहँस-करके
  - Harsh Kumar Bhatnagar
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