jaane kii sochta hooñ jab kabhi bachpan kii taraf | जाने की सोचता हूँ जब कभी बचपन की तरफ़

  - Harsh Kumar Bhatnagar
जानेकीसोचताहूँजबकभीबचपनकीतरफ़
मैंपहुँचजाताहूँतबफिरकिसीबंधनकीतरफ़
बेवक़ूफ़ीकहूँइसकोयाकहूँमेराग़ुरूर
जोचलाजाताहूँमैंरोज़हीउलझनकीतरफ़
क़ैदमेंरखनेसेदस्तूरनहींबदलेगा
तितलियाँजारहीहैंफिरउसीआँगनकीतरफ़
झोलियाँबोझउठानेकोबनीतोनहींहैं
डालदेनाकभीकुछफूलभीदामनकीतरफ़
इसज़मानेसेकहींदूरचलेजातेहैं
तूमिरेमनकीतरफ़मैंतिरेमनकीतरफ़
  - Harsh Kumar Bhatnagar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy