sar-basar ik uljhti paheli hooñ | सर-बसर इक उलझती पहेली हूँ

  - Mahnaz Anjum
सर-बसरइकउलझतीपहेलीहूँ
औरमेरीउलझनकी
सुलझनभीदुश्वारहै
तागातागामुझेकौनखोले
मुझेरंग-दर-रंग
औरहर्फ़-दर-हर्फ़परखे
कहींऐसीचश्म-ए-फुसूँ-कारहैतोबताओ
मिरीबे-दिलीकेशिकस्ताकिनारो
मिरेख़्वाब-ए-हस्तीके
मौहूमरेशमको
किसधूपकी
ज़र्ददीमकनेचाटा
कौनसीख़्वाहिशोंकी
हरीटहनियोंपर
बरहनाहवाओंकेपंजेपड़े
किसतलबकीकथा
उनकेरास्तोंमेंकहींराह-ए-गुम-कर्दारहरवकीसूरत
ख़जिलऔरकम-रख़्तरहनेलगी
मैंउदासीकीगहरीसहेलीहूँ
तीखीपहेलीहूँ
औरमेरीउलझनकीसुलझनभीदुश्वारहै
मैंयुगोंसेकिसीदर्दकीख़ुश-हुनरउँगलियोंकी
तुनुक-ताबपोरोंसे
अपनापतापूछतीहूँ
बहुतकार-ए-उक़्दा-कुशाईकठिनहै
मगरमैंकिसीरंज-ए-बरसर
ख़याल-ए-जुनूँ-पेशाकी
आरज़ूकररहीहूँ
येगुंजलसुलझजाए
इसधुनमें
दिलकेनशेबोंको
क्याक्यालहूकररहीहूँ
  - Mahnaz Anjum
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