baso ka shor dhuaan gard dhoop ki shiddat | बसों का शोर धुआँ गर्द धूप की शिद्दत

  - Mahmood Ayaz
बसोंकाशोरधुआँगर्दधूपकीशिद्दत
बुलंदबालाइमारातसर-निगूँइंसाँ
तलाश-ए-रिज़्क़मेंनिकलाहुआयेजम्म-ए-ग़फ़ीर
लपकतीभागतीमख़्लूक़कायेसैल-ए-रवाँ
हरइककेसीनेमेंयादोंकीमुनहदिमक़ब्रें
हरएकअपनीहीआवाज़-ए-पासरू-गर्दां
येवोहुजूमहैजिसमेंकोईफ़लकपेनहीं
औरइसहुजूम-ए-सर-ए-राहसेगुज़रतेहुए
जानेकैसेतुम्हारीवफ़ाकरमकाख़याल
मिरेजबींकोकिसीदस्त-ए-आश्नाकीतरह
जोछूगयाहैतोअश्कोंकेसोतेफूटपड़े
सुमूमरेगकेसहरामेंइकनफ़सकेलिए
चलीहैबाद-ए-तमन्नातोउम्रभरकीथकन
सर-ए-मिज़ासिमटआईहैएकआँसूमें
येवोगुहरहैजोटूटेतोख़ाक-ए-पामेंमिले
येवोगुहरहैजोचमकेतोशब-चराग़बने
  - Mahmood Ayaz
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