khulii aankhoñ ko koi band kar do | खुली आँखों को कोई बंद कर दो

  - Mahmood Ayaz
खुलीआँखोंकोकोईबंदकरदो
खुलीआँखोंकीवीरानीसेहौलआताहै
कोईइनखुलीआँखोंकोबढ़करबंदकरदो
येआँखेंइकअनोखीयख़-ज़दादुनियाकी
साकितरौशनीमेंखोगईहैं
अबइनआँखोंमें
कोईरंगपैदाहैकोईरंगपिन्हाँहै
कोईअक्स-ए-गुल-बनहै
कोईदाग़-ए-हिर्मांहै
गंज-ए-शाएगाँकीआरज़ू-ए-बे-निहायतहै
रंज-ए-राएगाँकाअक्स-ए-लर्ज़ांहै
अगरकुछहैतोबस
इकयख़-ज़दानयाकानक़्श-ए-जावेदाँहै
येआँखें
अबशुआ-ए-आरज़ूकीहरकिरनसेयूँँगुरेज़ाँहैं
किपत्थरबनगईहैं
येआँखेंमरगईहैं
  - Mahmood Ayaz
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