tum ne mujh se | तुम ने मुझ से

  - Mahmood Ayaz
तुमनेमुझसे
कोईइक़रार‌‌‌‌-ए-रिफ़ाक़तकिया
येकहा
तुमसेबिछड़जाऊँतोज़िंदारहूँ
मैंनेतुम्हें
ज़ीस्तकासरमाया
मिराहासिल-ए-यक-उम्र-ए-तमन्नाकहा
इसक़दरझूटसेदहशत-ज़दाथेहम
किकोईसचकहा
मैंनेबसइतनाकहा
देखोहमऔरतुमइसआगकाहिस्साहैं
जोख़ाशाककीमानिंदजलातीहैहमें
तुमनेबसइतनाकहा
देखोइसआगमेंहमदोनोंअकेलेभीहैं
साथीभीहैं
औरहमकरतेरहेउम्र-ए-मह-ओ-सालकेज़ख़्मोंकाशुमार
कहकशाँफीकीहैकुछदेरकामेहमानहैचाँद
डूबतीरातमेंढलतेहुएसाएचुपहैं
मेरीशिरयानोंमेंयख़-बस्तालहूहैराँहै
अव्वलींक़ुर्बकीयेआँचकहाँसेआई
अजनबीकैसेकहूँ
तुमतोमिरेदिलकेनिहाँ-ख़ानेमेंसोएहुएहरख़्वाबकाचेहरानिकले
  - Mahmood Ayaz
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