mauj-e-sehba men tamannaa ke safeene kho kar | मौज-ए-सहबा में तमन्ना के सफ़ीने खो कर

  - Mahmood Ayaz
मौज-ए-सहबामेंतमन्नाकेसफ़ीनेखोकर
नग़्मारक़्सकीमहफ़िलसेजोघबराकेउठा
एकहँसतीहुईगुड़ियानेइशारेसेकहा
तुमजोचाहोतोमैंशबभरकीरिफ़ाक़तबख़्शूँ
जुम्बिश-ए-अबरूनेअल्फ़ाज़कीज़हमतभीदी
नीम-वाआँखोंमेंइकदावत-ए-ख़ामोशलिए
यूँँसिमटकरमिरीआग़ोशमेंआईजैसे
भरीदुनियामेंबसइकगोशा-ए-राहतथायही
हमभीवीरानगुज़रगाहोंपेचलतेचलते
घरतकआएतोकोईरंग-ए-तकल्लुफ़हीथा
दोबदनमिलतेहीयूँँहमदम-ए-देरीनाबने
तनदही-ए-शौक़मेंदूरीकाहरएहसासमिटा
सुब्हकेसाथखुलीआँखतोएहसासहुआ
मेरेसीनेमेंकोईचीज़थीजोटूटगई
देरसेदेखरहीथीतिरीतस्वीरमुझे
तेरेआरिज़पेथीबहतेहुएअश्कोंकीनमी
तेरीख़ामोशनिगाहोंमेंकोईशिकवाथा
देखतेदेखतेवीरानी-ए-दिलऔरबढ़ी
तेरीतस्वीरकोसीनेसेलगाकरपूछा
किसतरब-ज़ारमेंआसूदाहैराहत-ए-ज़ीस्त
मुझेइनआगकेशालोंमेंकहाँछोड़गई
  - Mahmood Ayaz
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