KHaamushi rengti hai raahon par | ख़ामुशी रेंगती है राहों पर

  - Mahmood Ayaz
ख़ामुशीरेंगतीहैराहोंपर
एकअफ़्सूँ-ब-दोशख़्वाबलिए
रातरुकरुककेसाँसलेतीहै
अपनीज़ुल्मतकाबोझउठाएहुए
मुज़्महिलचाँदकीशुआ'ओंमें
बीतेलम्होंकीयादरक़्साँहै
जानेकिनमाह-ओ-सालकासाया
वक़्तकीआहटोंपेलर्ज़ांहै
एकयादइकतसव्वुर-ए-रफ़्ता
सीना-ए-माहसेउभरताहै
हैयेसरशारी-ए-हयातकारंग
दर्दकिनमंज़िलोंसेगुज़राहै
  - Mahmood Ayaz
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