tamaam umr ke sood o ziyaan ka baar li.e | तमाम उम्र के सूद ओ ज़ियाँ का बार लिए?

  - Mahmood Ayaz
तमामउम्रकेसूदज़ियाँकाबारलिए?
हरइंक़लाबज़मानेसेमुँहछुपाएहुए
हयातमर्गकीसरहदपेनीम-ख़्वाबीदा
मैंमुंतज़िरथा
मसर्रतकीकोईधुँदलीकिरन
ज़माँमकाँसेपरेअजनबीजज़ीरोंसे
दम-ए-सहरमुझेख़्वाबोंमेंढूँडतीआए
फ़िशार-ए-वक़्तकीसरहदसेदूरलेजाए
खुलीजोआँख
तुलू-ए-सहरनेहँसकेकहा
हिसार-ए-वक़्तसेआगेकोईमक़ामनहीं
समझसको,तोज़मानमकाँकीक़ैदनहीं
समझसको
तोयहीज़ातबे-कराँभीहै
  - Mahmood Ayaz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy