phir vahii be-dili phir vahii maazrat | फिर वही बे-दिली फिर वही माज़रत

  - Liyaqat Ali Aasim
फिरवहीबे-दिलीफिरवहीमाज़रत
बसबहुतहोचुकाज़िंदगीमाज़रत
ख़ुद-कलामीसेभीरूठजातीहैतू
अबबोलूँगाख़ामुशीमाज़रत
धूपढलभीचुकीसाएउठभीचुके
अबमिरेयारकिसबातकीमाज़रत
दादबे-दादमेंदिलनहींलगरहा
दोस्तोशुक्रियाशाएरीमाज़रत
बे-ख़ुदीमेंख़ुदाईकादावाकिया
ख़ुदादर-गुज़रख़ुदीमाज़रत
तुझसेगुज़रीहुईज़िंदगीमाँगली
रब्ब-ए-इमरोज़-ओ-फ़र्दा-ओ-दीमाज़रत
इकनज़रउसनेदेखाहै'आसिम'चलो
दूरहीसेसहीहोचुकीमाज़रत
  - Liyaqat Ali Aasim
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy