kabhi KHaamosh rahkar bhi tamasha dekh leta hooñ | कभी ख़ामोश रहकर भी तमाशा देख लेता हूँ

  - Kushal "PARINDA"
कभीख़ामोशरहकरभीतमाशादेखलेताहूँ
तेरीआँखोंमेंलिपटाइकफ़सानादेखलेताहूँ
कभीतन्हाइयोंमेंदिलबहुतचुपचापरोताहै
उसीख़ामोशआँसूमेंसितारादेखलेताहूँ
लबोंसेजोकहपाएवोआँसूबोलजातेहैं
मैंउनकीख़ामुशीमेंभीनज़ारादेखलेताहूँ
मैंजलतेशहरकीख़ामोशियाँभीपीगयाकबका
मगरअबभीधुएँमेंइकउजालादेखलेताहूँ
मैंअपनीतिश्नगीमेंभीसमुंदरढूँढ़लेताहूँ
कभीजज़्बातपीकरभीनशासादेखलेताहूँ
वोचेहराजबनज़रसेदूरहोताहैकईदिनतक
मैंशीशेमेंतसव्वुरकासहारादेखलेताहूँ
उठालेतीहैख़ुशबूहरतरफ़बिखरेहुएलम्हे
मैंवीरानीकीदीवारोंपेनक़्शादेखलेताहूँ
जलाकररौशनीवोदूरबैठामुस्कराताहै
मैंगिरतीबूँदमेंटूटाशरारादेखलेताहूँ
परिंदाअबहवाओंसेभीरस्तामाँगलेताहै
कभीउड़तेहुएख़ुदकोकिनारादेखलेताहूँ
  - Kushal "PARINDA"
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