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Kush Pandey ' Saarang '
virah ke geet gaata ek premi
virah ke geet gaata ek premi | विरह के गीत गाता एक प्रेमी
- Kush Pandey ' Saarang '
विरह
के
गीत
गाता
एक
प्रेमी
हज़ारों
दिल
को
जीते
जा
रहा
है
- Kush Pandey ' Saarang '
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राहों
में
जान
घर
में
चराग़ों
से
शान
है
दीपावली
से
आज
ज़मीन
आसमान
है
Obaid Azam Azmi
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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बस
यूँँ
ही
मेरा
गाल
रखने
दे
मेरी
जान
आज
गाल
पर
अपने
Jaun Elia
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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पर्दादारी
ठीक
है
लेकिन
झूठ
पे
पर्दे
मत
डालो
दोस्त
बना
लो
दुनिया
को
पर
दुश्मन
ज़्यादा
मत
पालो
Kush Pandey ' Saarang '
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मुसीबत
की
ठोकर
हमें
जो
लगे
हैं
पता
चल
गया
कौन
कितने
सगे
हैं
Kush Pandey ' Saarang '
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अधर
से
जब
अधर
मिलने
लगेंगे
हसीं
से
पुष्प
दो
खिलने
लगेंगे
तरक्की
मान
लेना
तुम
भी
अपनी
जगत
के
लोग
जब
जलने
लगेंगे
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Kush Pandey ' Saarang '
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बदलते
दौर
के
जो
संग
चलते
हैं
वही
कुछ
लोग
ही
दुनिया
बदलते
हैं
इसी
जनता
के
कर
भुगतान
से
हरदम
मियाँ
संसद
भवन
के
दीप
जलते
हैं
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Kush Pandey ' Saarang '
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मैं
अपने
आप
से
बातें
करूँँ
हूँ
मुझे
मिलता
नहीं
हमराज़
कोई
Kush Pandey ' Saarang '
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