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Kumar Rishi
aaj phir tez baarish aayi
aaj phir tez baarish aayi | आज फिर तेज बारिश आई
- Kumar Rishi
आज
फिर
तेज
बारिश
आई
और
बहा
ले
गई
एक
मजदूर
की
झोपड़ी
एक
चिड़िया
का
घोंसला
एक
किसान
का
खेत
एक
दीवार
जो
कल
ही
ग़रीब
मजदूर
औरतों
ने
तपती
धूप
में
बनाई
थी
बस
नहीं
बहा
पाई
तो
भ्रष्टाचार
की
नींव
पर
खड़ी
वो
आलीशान
इमारत
जो
तेज
बारिश
पर
हँसती
थी
एक
सवाल
अब
भी
ज़ेहन
में
कौंधता
है
क्या
प्रकृति
का
न्याय
करने
का
यही
तरीका
है।
- Kumar Rishi
ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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अभी
रौशन
हुआ
जाता
है
रस्ता
वो
देखो
एक
औरत
आ
रही
है
Shakeel Jamali
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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धूप
निकली
है
बारिशों
के
ब'अद
वो
अभी
रो
के
मुस्कुराए
हैं
Anjum Ludhianvi
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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ये
भँवरे
रौशनी
खो
देंगे
अपनी
आँखों
की
अगर
चमन
में
जो
कलियाँ
नक़ाब
ओढेंगी
Shajar Abbas
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रुकें
तो
धूप
से
नज़रें
बचाते
रहते
हैं
चलें
तो
कितने
दरख़्त
आते
जाते
रहते
हैं
Charagh Sharma
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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मिरी
रौशनी
तिरे
ख़द्द-ओ-ख़ाल
से
मुख़्तलिफ़
तो
नहीं
मगर
तू
क़रीब
आ
तुझे
देख
लूँ
तू
वही
है
या
कोई
और
है
Saleem Kausar
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दिलों
के
ज़ख़्मों
को
यूँँ
हीं
मिटाया
नहीं
जा
सकता
कि
तेरा
हो
गया
मैं
अब
मिटाया
नहीं
जा
सकता
Kumar Rishi
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बड़ा
बेदर्द
होता
है
आसमान
ज़मीं
से
छीन
लेता
है
इंसान
Kumar Rishi
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वो
मेरी
बाँहों
में
आ
ना
सका
मैं
उनकी
बाँहों
में
जा
ना
सका
बातें
दिल
की
दिल
में
ही
रह
गईं
आँसू
भी
आँखों
में
आ
ना
सका
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Kumar Rishi
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जैसे
ही
मुझे
उसे
मनाना
आ
गया
मेरे
और
उसके
बीच
ज़माना
आ
गया
Kumar Rishi
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ख़ूब-सूरत
चेहरे
यूँँ
हीं
हिजाब
में
नहीं
होते
बेवजह
काँटें
यूँँ
हीं
गुलाब
में
नहीं
होते
Kumar Rishi
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