hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Krish Gour 'Jazbaat'
bin tumhaare KHaak ke jaise pada tha
bin tumhaare KHaak ke jaise pada tha | बिन तुम्हारे ख़ाक के जैसे पड़ा था
- Krish Gour 'Jazbaat'
बिन
तुम्हारे
ख़ाक
के
जैसे
पड़ा
था
तुम
दिखे
हो
हाँ
तभी
अच्छा
हुआ
हूँ
- Krish Gour 'Jazbaat'
Download Sher Image
ग़लतफ़हमी
न
पाला
कीजिए
लड़कपन
को
सँभाला
कीजिए
मुझे
ज्योतिष
समझ
कर
मान
लें
ग़मों
की
रोज़
माला
कीजिए
दिखेगी
हर
कमी
में
इक
कमी
उजाले
पर
उजाला
कीजिए
ये
कैसा
मुँह
फुलाना
आपका
कभी
तो
हँस
के
टाला
कीजिए
निखर
के
आएगा
ग़म
और
भी
मेरे
साँचे
में
ढाला
कीजिए
ग़ज़ल
है
मेरे
दिल
का
आइना
न
इसको
यूँँ
उछाला
कीजिए
Read Full
Krish Gour 'Jazbaat'
Download Image
1 Like
हम
तो
ये
समझे
थे
अपने
हाथ
था
मेंगे
किसने
कब
ख़ंजर
छुपाए
साफ
दिखते
हैं
Read Full
Krish Gour 'Jazbaat'
Send
Download Image
1 Like
रूठी
हुई
ख़ुशी
से
गिले
कर
रहे
हैं
हम
यानी
कि
मतलबी
से
गिले
कर
रहे
हैं
हम
क्यूँ
आप
मेरे
दिल
को
मसल
कर
चले
गए
तस्वीर
आपकी
से
गिले
कर
रहे
हैं
हम
ये
किस
की
चाॅंदनी
मेरे
हिस्से
में
आ
गई
ये
किस
की
आशिक़ी
से
गिले
कर
रहे
हैं
हम
Read Full
Krish Gour 'Jazbaat'
Download Image
1 Like
अगर
घर
छोड़
लगता
है
ये
दुनिया
हाथ
आयेगी
ग़लत-फ़हमी
न
पाला
कर
तू
दुनिया
छोड़
आया
है
Krish Gour 'Jazbaat'
Send
Download Image
1 Like
निभाई
थी
उसी
ने
इश्क़
की
रस्में
सलीक़े
से
हमीं
पागल
थे
हमको
ज़ख़्म
को
सिलना
नहीं
आया
Krish Gour 'Jazbaat'
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Wafa Shayari
Delhi Shayari
Baaten Shayari
Gham Shayari
Nazar Shayari