usse milkar bhatke ho tum | उस सेे मिलकर भटके हो तुम

  - Krish Gour 'Jazbaat'
उससेेमिलकरभटकेहोतुम
क्यासोचाक्यानिकलेहोतुम
झूठीक़स
मेंखाकरअपनी
ज़िंदाकैसेरहतेहोतुम
हँसकरमिलनेवालेलड़के
इतनेअच्छेकैसेहोतुम
आँखेंबातेंलहजादेखो
सचमेंग़मकेअपनेहोतुम
क्यूँदिलकोबेचैनकिएहो
किससाएकेपीछेहोतुम
मैंतोकबकाचलागयाहूँ
लाशलिएक्यूँबैठेहोतुम
  - Krish Gour 'Jazbaat'
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