मंसूब चराग़ों से तरफ़-दार हवा के

  - Komal Joya
मंसूबचराग़ोंसेतरफ़-दारहवाके
तुमलोगमुनाफ़िक़होमुनाफ़िक़भीबलाके
क्यूँज़ब्तकीबुनियादहिलानेपेतुलाहै
मैंफेंकदूँहिज्रतुझेआगलगाके
इकज़ूद-फ़रामोशकीबे-फ़ैज़मोहब्बत
जाऊँगीगुज़रतेहुएरावीमेंबहाके
इसवक़्तमुझे'उम्र-ए-रवाँदर्दबहुतहै
तुझसेमैंनिमटतीहूँज़रादेरमेंके
मैंअपनेख़द-ओ-ख़ालहीपहचानपाई
गुज़राहैयहाँवक़्तबड़ीधूलउड़ाके
करतीहूँतर-ओ-ताज़ाहरीरुतकेमनाज़िर
काग़ज़पेकभीपेड़कभीफूलबनाके
  - Komal Joya
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