जब कभी ख़ुद को ये समझाऊँ कि तू मेरा नहीं

  - Khursheed Rizvi
जबकभीख़ुदकोयेसमझाऊँकितूमेरानहीं
मुझमेंकोईचीख़उठताहैनहींऐसानहीं
वारदात-ए-दिलकाक़िस्साहैग़म-ए-दुनियानहीं
शे'रतेरीआरसीहैमेराआईनानहीं
कबनिकलताहैकोईदिलमेंउतरजानेकेबाद
इसगलीकीदूसरीजानिबकोईरस्तानहीं
तुमसमझतेहोबिछड़जानेसेमिटजाताहैइश्क़
तुमकोइसदरियाकीगहराईकाअंदाज़ानहीं
उनसेमिलकरभीकहाँमिटताहैदिलकाइज़्तिराब
इश्क़कीदीवारकेदोनोंतरफ़सायानहीं
कबतेरीबू-ए-वफ़ासेबे-वफ़ाईदिलनेकी
कबमुझेबाद-ए-शबानेख़ूनरुलवायानहीं
मतसमझमेरेतबस्सुमकोमसर्रतकीदलील
जोमेरेदिलतकउतरताहोयेवोज़ीनानहीं
यूँँतराशूँगाग़ज़लमेंतेरेपैकरकेनुक़ूश
वोभीदेखेगातुझेजिसनेतुझेदेखानहीं
सब्तहैइसबामडरपरतेरीआवाज़ोंकेनक़्श
मैंख़ुदा-ना-कर्दापत्थरपूजनेवालानहीं
ख़ामुशीकाग़ज़केपैराहनमेंलिपटीख़ामुशी
अर्ज़-ए-ग़मकाइससेबेहतरकोईपैरायानहीं
कबतलकपत्थरकीदीवारोंमेंदस्तकदीजिए
तेरेसीनेमेंतोशायदकोईदरवाज़ानहीं
  - Khursheed Rizvi
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