रोज़बिखरतेइनकीमाँगकेमोतीहैं
शायदकेधागोंमेंरोज़पिरोतीहैं
दानमिलीगायोंसेजबतकदूधमिले
तबतकहीआँगनकीशोभाहोतीहैं
क़त्लोंसेयाँधर्मबचाएजातेहैं
कपड़ोंसेयाँमर्यादाएँखोतीहैं
हाँकरहेथेजोवोथककरबैठगए
ढोनेकीआदतकोपीठेंढोतीहैं
उनऔलादोंकानाभीअमृतसूखचुका
माएँजिनकीमाँहोनेपररोतीहैं
अपनीचुप्पीसाफ़सुनाईदेतीहै
कुछरातेंतोइतनीतन्हाहोतीहैं
मेरेछोटेक़दपरबिल्कुलमतजाना
सँकरीनदियाँअक्सरगहरीहोतीहैं
कीर्तितूअंदाज़बिगाड़ेबैठीहै
ग़ज़लेंइतनीकड़वीथोड़ीहोतीहैं