kyun bhaage manzil kii havas men chal lambe raste se chal | क्यूँँ भागे मंज़िल की हवस में चल लंबे रस्ते से चल

  - Shayra kirti
क्यूँँभागेमंज़िलकीहवसमेंचललंबेरस्तेसेचल
दुनियाबेशकदौड़रहीहोपरतूधी
मेंधी
मेंचल
क्याबोलेंगेचारफ़लानेपेश-ओ-पसताने-बाने
इतनेबोझसेथकजाएगालेकरहल्केबस्तेचल
बैठेबैठेहाँपरहाहैभाँपरहाकलकासंकट
कहाँकिसीनेकलदेखाहैभोलेनाथभरोसेचल
लगनमेंतेरीधारहैइतनीपर्वतभीकटसकतेहैं
अपनेआपबनेंगेरस्तेअपनीधुनमेंचलतेचल
कंकड़पत्थरजोड़रहाहैकलइकमहलबनाऊँगा
महलकेशानेढहजानेहैंदोस्तदिलोंमेंबसतेचल
नयेमुसाफ़िरतुझेमुबारकहाथछुड़ाजानेवाले
कोईपीछेछूटरहाहैथोड़ामुड़ते-मुड़तेचल
  - Shayra kirti
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