zindagi ke azaab kya kahiye | ज़िंदगी के अज़ाब क्या कहिए

  - Priya omar
ज़िंदगीकेअज़ाबक्याकहिए
दर्द-ओ-ग़मदस्तियाबक्याकहिए
हरघड़ीयादउनकीआतीरही
अबशब-ए-इज़्तिराबक्याकहिए
राह-ए-उल्फ़तमेंकोईठहरानहीं
सायाअबहमरकाबक्याकहिए
तल्ख़लहजाकभीअपनाया
होगएलाजवाबक्याकहिए
वोमुकम्मलकभीकरपाए
वादेउनकेहुबाबक्याकहिए
दर्दबिखराग़ज़लकेसफ़्होंमें
औरहमबे-नक़ाबक्याकहिए
कबतलकयेअनारहेगी'प्रिया'
जिस्महैजबतुराबक्याकहिए
  - Priya omar
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