qadam rukte hi raste bolte hain | क़दम रुकते ही रस्ते बोलते हैं

  - Kartik Bhalerao
क़दमरुकतेहीरस्तेबोलतेहैं
चलोतोलोगअंधेबोलतेहैं
हमारेज़िंदगीकीदास्ताँतो
हमारेकालेचश्मेंबोलतेहैं
दरख़्तोंकाबढ़ायाहुस्नहमने
नएमौसमकेपत्तेबोलतेहैं
फ़रिश्तेभीपशेमाँहोतेहैजब
दिवानोंकेकरिश्मेंबोलतेहैं
सहारादोमेरीपरवाज़कोतुम
हवाओंसेपरिंदेबोलतेहैं
जहाँपेमाहिर-ए-गुफ़्तारचुपहों
वहाँपरसिर्फ़गूँगेबोलतेहैं
ख़मोशीयादआतीहैतेरीजब
दिवानेपत्थरोंसेबोलतेहैं
सलीक़ाहीनहींमालूमहमको
बड़ेलोगोंसेकैसेबोलतेहैं
ग़रीबीसरझुकाकेकहरहीथी
अमीरोंकेतोपैसेबोलतेहैं
  - Kartik Bhalerao
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