aawaargi ho gaii hai khasta-jigar | आवारगी हो गई है ख़स्ता-जिगर

  - Karal 'Maahi'
आवारगीहोगईहैख़स्ता-जिगर
मैंनेकियाआजहीतयघरकासफ़र
घरभीकहेसुनज़रातूबे-ख़बर
बिनहम-नफ़सजज़्बसारेहैंबे-बसर
यादगयाघरतुझेजबबोलाकिवाड़
इककैफ़ियतजागउठीमुझ
मेंमुख़्तसर
धुँधलीनज़रखिड़कियोंकीमुझपरपड़ी
बोलीरहेकिसनशेमनमेंरातभर
उकताकेआँगनमिरामुझसेेयेकहे
भटकेदिशायाहुआअबघररह-गुज़र
पहलेक़दमपरहीसीढ़ीनेतंज़में
टोकाकेमंज़िलनहींमैंतेरीबशर
आतामुझेदेखछतपरचौंकीमुँडेर
क्याबातहै'अर्शआयाहैफ़र्शपर
तुमपरहमारानहीं'माही'इख़्तियार
अबहमतुम्हेंयादआएँबाद-ए-सफ़र
  - Karal 'Maahi'
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