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Kanval Dibaivi
gulshan men rut nayi hai
gulshan men rut nayi hai | गुलशन में रुत नई है
- Kanval Dibaivi
गुलशन
में
रुत
नई
है
हर
सम्त
बे-ख़ुदी
है
हर
गुल
पे
ताज़गी
है
मसरूर
ज़िंदगी
है
सरचश्मा-ए-ख़ुशी
है
छब्बीस
जनवरी
है
हर
सू
ख़ुशी
है
छाई
सब
ने
मुराद
पाई
फिर
जनवरी
ये
आई
यौम-ए-सुरूर
लाई
साअ'त
मुराद
की
है
छब्बीस
जनवरी
है
आँखों
में
रंग-ए-नौ
है
बातिल
से
जंग-ए-नौ
है
साज़
और
चंग-ए-नौ
है
हर
दर
पे
संग-ए-नौ
है
पुर
कैफ़
ज़िंदगी
है
छब्बीस
जनवरी
है
मैं
गुनगुना
रहा
हूँ
मस्ती
में
गा
रहा
हूँ
ख़ुशियाँ
मना
रहा
हूँ
आलम
पे
छा
रहा
हूँ
दिल
महव-ए-बे-ख़ुदी
है
छब्बीस
जनवरी
है
हिन्दोस्तान
ख़ुश
है
हर
पासबान
ख़ुश
है
हर
नौ-जवान
ख़ुश
है
सारा
जहान
ख़ुश
है
एक
जोश-ए-सरमदी
है
छब्बीस
जनवरी
है
- Kanval Dibaivi
मैं
जब
मर
जाऊँ
तो
मेरी
अलग
पहचान
लिख
देना
लहू
से
मेरी
पेशानी
पे
हिंदुस्तान
लिख
देना
Rahat Indori
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इसी
जगह
इसी
दिन
तो
हुआ
था
ये
एलान
अँधेरे
हार
गए
ज़िंदाबाद
हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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बहुत
मुश्किल
है
कोई
यूँँ
वतन
की
जान
हो
जाए
तुम्हें
फैला
दिया
जाए
तो
हिन्दुस्तान
हो
जाए
Kumar Vishwas
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हमने
जिम्मेदारी
दी
है
देश
चलाने
की
फेल
हुए
तो
उनको
लानत
भी
हम
ही
देंगे
Atul K Rai
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मज़हब
नहीं
सिखाता
आपस
में
बैर
रखना
हिन्दी
हैं
हम
वतन
है
हिन्दोस्ताँ
हमारा
Allama Iqbal
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फिर
उठी
आख़िर
सदा
तौहीद
की
पंजाब
से
हिन्द
को
इक
मर्द-ए-कामिल
ने
जगाया
ख़्वाब
से
Allama Iqbal
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सारे
जहाँ
से
अच्छा
हिन्दोस्ताँ
हमारा
हम
बुलबुलें
हैं
इस
की
ये
गुलसिताँ
हमारा
Allama Iqbal
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हम
हैं
हिन्दी
और
हमारा
मुल्क
है
हिन्दोस्ताँ
हिन्द
में
पैदा
तसव्वुफ़
के
ज़बाँ-दाँ
कीजिए
Sahir Dehlavi
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तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
हो
मेरी
जाँ
जितना
प्यारा
है
कश्मीर
इस
देश
को
Alankrat Srivastava
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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