inaayat | "इनायत"

  - Kanor
"इनायत"
हुस्नदेखनाहैतोआईनादेखोजानाँ
हुस्नदिखेगाकयामतदिखेगी
मेरीआँखोंमेंतोसिर्फ़हसरतहैइबादतहै
जैसेझंकारकिसीघुंगरूकी
उसकेपाजेबमेंहोनेसेमुक्कमलहै
उनपाजेबकानसीबतुम्हारेपहननेसेकामिलहै
वैसेहीउसआईनेकीभीआसहोगी
रोज़तुम्हेंदेखकरवोख़ुदकोसँवारताहोगा
ख़ुदकोतुम्हारेकाबिलकरताहोगा
देखोउसकोभीकभी
उसकोभीदीदार-ए-हुस्नकामौकादो
नूरदेखनाहैतोअपनीमाँकेचेहरेपरदेखो
जिससेेतुम
मेंयेअदाआईहै
उनकीआँखोंमेंइफ़्फ़तहैइश्रतहै
मुझेज़रहोनाहैज़बरहोनाहै
तुम्हारीनज़रोकेसबसेेक़रीबहोनाहै
काजलख़ूब-सूरततोनहींहै
परउसनेतुम्हेंहसीनबनायाहै
मुझेतुम्हारीआँखोंकाकाजलहोनाहै
बहरहालकलउसेधुलनाहै
येजानतेहुएभीआँखोंमेंरहा
उसनेकभीनिकलनेकीजुम्बिशनहींकी
ज़ुर्रतदेखनीहैतोमेरीक़लमकीदेखो
जिसनेतुम्हेंसचदिखाया
भलाबतायाकभीकभीबुराकिया
देखनाहैकुछअगरतोअपनेक़रीबदेखोजानाँ
उनघुंघरुओंकोउसकाजलको
घुँघरुओंकोकभीकभीटूटजानाहै
काजलकोकभीकभीधुलनाहै
जहानमेंलोगभीऐसेआएँगे
घुँघरुओंकीतरह,काजलकीतरह
मेरहबांरहनाउनकीतरफ़
उन्हींकीवजहसेतुमआराइशहोपरिवशहो
  - Kanor
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