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Kamal Upadhyay
chalte jaata hoonus ki baahen thaa
chalte jaata hoonus ki baahen thaa | चलते जाता हूँ
- Kamal Upadhyay
चलते
जाता
हूँ
उस
की
बाहें
था
में
वो
थकता
नहीं
मैं
रुकता
नहीं
हूँ
बचपन
से
साथ
हूँ
बदले
है
रंग
कई
उस
ने
और
मैं
ने
अक्सर
तन्हाई
में
हम
साथ
होते
है
वो
पत्तो
से
लदा
हुआ
कभी
धूप
में
जलता
हुआ
बरसात
में
न
चाहे
भीगता
हुआ
वो
रास्ता
जो
मेरे
घर
से
निकल
कर
दूर
जंगलों
में
जाता
है
वो
आज
भी
तन्हाई
में
मेरा
साथ
निभाता
है
उस
से
बचपन
की
कितनी
यादें
है
जुड़ी
मेरे
पैदा
होने
पर
वो
मिट्टी
का
था
वो
मुझ
को
पटकता
मैं
उसे
पटकता
था
अक्सर
आपा-धापी
में
हम
दोनों
लाल-पीले
हो
जाते
थे
एक
बार
ज़ोर
से
पटक
दिया
था
मैं
ने
उसे
कुछ
खरोंचे
आई
मुझे
उस
की
भी
कलाई
छिल
गई
थी
दोनों
मिल
कर
साथ
चीख़े
थे
वो
रास्ता
जो
मेरे
घर
से
निकल
कर
दूर
जंगलों
में
जाता
है
वो
आज
भी
तन्हाई
में
मेरा
साथ
निभाता
है
मेरे
साथ
वो
भी
कपड़े
बदलने
लगा
लाल
से
पीला
पीले
से
ईंटे
का
ईंटे
से
पत्थर
का
पत्थर
से
डामर
का
हो
गया
बदलते
समय
के
साथ
मैं
और
रास्ता
बदल
गया
लेकिन
लेकिन
हम
आज
भी
साथ
चलते
है
वो
रास्ता
जो
मेरे
घर
से
निकल
कर
दूर
जंगलों
में
जाता
है
वो
आज
भी
तन्हाई
में
मेरा
साथ
निभाता
है
इस
बार
जब
उस
से
मिलने
गया
तो
बड़ा
दुखी
था
वो
कहता
है
पुरानी
डामर
सूखती
नहीं
ये
नई
उडेल
देते
तेरी
सुर्ख़
यादो
को
खन
कर
कही
ढकेल
देते
है
वो
रास्ता
जो
मेरे
घर
से
निकल
कर
दूर
जंगलों
में
जाता
है
वो
आज
भी
तन्हाई
में
मेरा
साथ
निभाता
है
- Kamal Upadhyay
लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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सावन-रुत
और
उड़ती
पुर्वा
तेरे
नाम
धूप-नगर
से
है
ये
तोहफ़ा
तेरे
नाम
Tajdar Adil
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मैं
बहुत
ख़ुश
था
कड़ी
धूप
के
सन्नाटे
में
क्यूँँ
तेरी
याद
का
बादल
मेरे
सर
पर
आया
Ahmad Mushtaq
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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अब
की
सर्दी
में
कहाँ
है
वो
अलाव
सीना
अब
की
सर्दी
में
मुझे
ख़ुद
को
जलाना
होगा
Naeem Sarmad
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धूप
ये
अठखेलियाँ
हर
रोज़
करती
है
एक
छाया
सीढ़ियाँ
चढ़ती
उतरती
है
यह
दिया
चौरास्ते
का
ओट
में
ले
लो
आज
आँधी
गाँव
से
हो
कर
गुज़रती
है
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Dushyant Kumar
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बाद-ए-बहार
में
सब
आतिश
जुनून
की
है
हर
साल
आवती
है
गर्मी
में
फ़स्ल-ए-होली
Wali Uzlat
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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गर्मी
लगी
तो
ख़ुद
से
अलग
हो
के
सो
गए
सर्दी
लगी
तो
ख़ुद
को
दोबारा
पहन
लिया
Bedil Haidri
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