kalaaee ki gha | कलाई की घड़ी को

  - Kamal Upadhyay
कलाईकीघड़ीको
आजबड़ेप्यारसेउतारा
औरउसकीकुंजीकोखींचकर
एकअसफलप्रयासकिया
घड़ीकोरोकनेका
फिरभीजबनामानीघड़ी
तो
चटकाकरउसकाकाँच
कुछघावोंसे
उसकीएकसूईकोतोड़दिया
घड़ीभीज़िद्दीक़िस्मकीहै
रुकनेकानामनहींहैलेती
कितनामुश्किलहै
वक़्तकोपकड़कररखना
याबाँधनाउसेकिसीवाक़िएकेसाथ
कुछबिगड़ेगाक्याउसका
यदिवोकुछदेरठहरजाएगातो
आख़िरमेंएकसूईको
पकड़करमोड़दिया
कुछइसतरहकि
अटकजाएवोवक़्तवही
मैंउनलम्होंकोमहसूसकरतारहूँ
वोलम्हाजहाँमैंकुछभीनहीं
लेकिनग़मभीनहीं
मेरेकुछनाहोनेका
अबअटकाकरसमयको
मैंमौजमनाऊँगा
  - Kamal Upadhyay
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