chaand bhi kambal odhe niklaa tha | चाँद भी कम्बल ओढ़े निकला था

  - Kamal Upadhyay
चाँदभीकम्बलओढ़ेनिकलाथा
सितारेठिठुररहेंथे
सर्दीबढ़रहीथी
ठण्डसेबचनेकेलिए
मुझेभीकुछरिश्तेजलानेपड़े
कुछरिश्ते
जोबसनामकेबचेथे
खींचरहाथा
मैंउनको
कभीवोमुझेखींचाकरतेथे
सर्दीबढ़रहीथी
ठण्डसेबचनेकेलिए
मुझेभीकुछरिश्तेजलानेपड़े
कुछरिश्ते
बहुतकमज़ोरहोचलेथे
उनकीलपटभीबहुतकमथी
कुछइतनेपतले
कीजलनेसेपहलेराखहोगए
सर्दीबढ़रहीथी
ठण्डसेबचनेकेलिए
मुझेभीकुछरिश्तेजलानेपड़े
कुछपुरानेरिश्तेथे
मेरेजनमकेपहलेके
सजोयाथाउन्हेंमैंने
उन्हेंनहींथाकोईलगावमुझसे
सर्दीबढ़रहीथी
ठण्डसेबचनेकेलिए
मुझेभीकुछरिश्तेजलानेपड़े
  - Kamal Upadhyay
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