roz ik fitna uthaate kyuuñ ho | रोज़ इक फ़ित्ना उठाते क्यूँ हो

  - Kamal Nadim
रोज़इकफ़ित्नाउठातेक्यूँहो
ज़ुल्मलोगोंपेयूँँढातेक्यूँहो
नस्ल-ए-आदमसेत'अल्लुक़रखकर
ख़ूनइंसाँकाबहातेक्यूँहो
हैंजोमासूमफ़रिश्तेउनको
पाठनफ़रतकापढ़ातेक्यूँहो
जबउजालेकेमुहाफ़िज़ठहरे
फिरचराग़ोंकोबुझातेक्यूँहो
पड़गयाक़हतहैक्यापानीका
ख़ूनसेप्यासबुझातेक्यूँहो
रंजिशेंकमहैंदिलोंमें'नादिम'
दूरियाँऔरबढ़ातेक्यूँहो
  - Kamal Nadim
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