kya jiyega koi ham khaak-nasheenon ki tarah | क्या जियेगा कोई हम ख़ाक-नशीनों की तरह

  - Kaleem Noori Firozabadi
क्याजियेगाकोईहमख़ाक-नशीनोंकीतरह
एकइकपलयहाँगुज़राहैमहीनोंकीतरह
उसनेचढ़करमिरेकाँधोंपेफ़लकचूमलिया
मैंज़मींपरहीखड़ारहगयाज़ीनोंकीतरह
दौर-ए-हाज़िरमेंमोहब्बतकाकोईमोलनहीं
दिलभीहोनेलगेनीलामज़मीनोंकीतरह
ख़ुदनहींचलताकोईऔरचलाताहैउसे
अबतोइंसानभीतुलताहैमशीनोंकीतरह
जबसेआयाहैफ़सादातकेमौसममेंउबाल
हमभीमौजोंमेंघिरेटूटेसफ़ीनोंकीतरह
मैंनेदुनियाकीनिगाहोंसेबचाकर'कलीम'
दिलमेंरक्खातिरीयादोंकोदफ़ीनोंकीतरह
  - Kaleem Noori Firozabadi
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