badli si apni aankhoñ men chhaai hui si hai | बदली सी अपनी आँखों में छाई हुई सी है

  - Kaleem Aajiz
बदलीसीअपनीआँखोंमेंछाईहुईसीहै
भूलीहुईसीयादफिरआईहुईसीहै
मतहाथरखसुलगतेकलेजेपेहम-नशीं
येआगदेखनेमेंबुझाईहुईसीहै
लेताहूँसाँसभीतोभटकताहैतन-बदन
रगरगमेंएकनोकसमाईहुईसीहै
बे-साख़्ताकहेहैजोदेखेहैज़ख़्म-ए-दिल
येचोटतोउन्हींकीलगाईहुईसीहै
मुद्दतहुईजलाईगईशाख़-ए-आशियाँ
अबतकइसीतरहसेजलाईहुईसीहै
जोइनकीबातहैवहीमेरीग़ज़लकीबात
लेकिनज़रायेबातबनाईहुईसीहै
छेड़ीग़ज़लजोतुमनेतोऐसालगा'कलीम'
ख़ुशबूकिसीकीज़ुल्फ़कीआईहुईसीहै
  - Kaleem Aajiz
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy