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"Nadeem khan' Kaavish"
vo aag si in hontho pe rahkar
vo aag si in hontho pe rahkar | वो आग सी इन होंठो पे रहकर
- "Nadeem khan' Kaavish"
वो
आग
सी
इन
होंठो
पे
रहकर
हाँ
प्यास
मेरी
बुझा
रही
हैं
- "Nadeem khan' Kaavish"
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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अभी
से
पाँव
के
छाले
न
देखो
अभी
यारो
सफ़र
की
इब्तिदा
है
Ejaz Rahmani
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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सुखाई
जा
रही
है
जुल्फ़
धोकर
घटा
या'नी
निचोड़ी
जा
रही
है
Satya Prakash Soni
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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वो
अजब
शख़्स
था
हर
हाल
में
ख़ुश
रहता
था
उस
ने
ता-उम्र
किया
हँस
के
सफ़र
बारिश
में
Sahiba sheharyaar
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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शब-ए-हिज्राँ
में
सुनता
था,
सलीब-ए-वक़्त
की
सिसकी
ये
कुछ
पागल
समझते
हैं
घड़ी
आवाज़
करती
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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इक
अधूरी
शाम
का
हिस्सा
हूँ
मैं
ख़ुद
को
पाने
ख़ुद
ही
अब
निकला
हूँ
मैं
तुझको
आँखों
से
शिक़ायत
है
तो
सुन
आइने
में
भी
नहीं
दिखता
हूँ
मैं
अपने
प्यासे
दिल
की
ठंडक
के
लिए
यार
इक
दरिया
जला
आया
हूँ
मैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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नया
कोई
'आशिक़
बनाया
गया
ये
प्यारा
सा
रिश्ता
जलाया
गया
सजी
थी
उदासी
की
महफ़िल
जहाँ
वहाँ
पर
हमें
ही
बुलाया
गया
हमीं
थे
जो
क़िस्से
में
लाये
तुझे
हमीं
को
ये
क़िस्सा
सुनाया
गया
हटा
दी
थी
तस्वीर
उसने
मेरी
वहाँ
इक
ग़ज़ल
को
लगाया
गया
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"Nadeem khan' Kaavish"
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हटा
दी
थी
तस्वीर
उसने
मेरी
वहाँ
इक
ग़ज़ल
को
लगाया
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"Nadeem khan' Kaavish"
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यूँँ
ही
नहीं
हम
दिल
के
हर
जज़्बात
लिखते
हैं
हर
बात
में
जाँ
डालकर
हर
बात
लिखते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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