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"Nadeem khan' Kaavish"
usii ne phir ujaada yaar
usii ne phir ujaada yaar | उसी ने फिर उजाड़ा यार
- "Nadeem khan' Kaavish"
उसी
ने
फिर
उजाड़ा
यार
जिसे
हमने
सँवारा
था
- "Nadeem khan' Kaavish"
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वहम
मुझको
ये
भाता
है
अभी
मेरी
दीवानी
है
मगर
मेरी
दीवानी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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एक
आवाज़
कि
जो
मुझको
बचा
लेती
है
ज़िन्दगी
आख़री
लम्हों
में
मना
लेती
है
जिस
पे
मरती
हो
उसे
मुड़
के
नहीं
देखती
वो
और
जिसे
मारना
हो
यार
बना
लेती
है
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Ali Zaryoun
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और
फिर
लोग
यही
कहते
फिरेंगे
इक
दिन
यार
कल
ही
तो
मेरी
बात
हुई
थी
उस
सेे
Saad Ahmad
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यार
माँगा
था
मोहब्बत
की
दु'आ
माँगी
थी
और
इस
दिल
के
हिफ़ाज़त
की
दु'आ
माँगी
थी
अब
तो
कुछ
उसका
बिगाड़ा
भी
नहीं
जा
सकता
मैंने
ख़ुद
उसके
सलामत
की
दु'आ
माँगी
थी
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Ritesh Rajwada
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हम
से
कोई
तअल्लुक़-ए-ख़ातिर
तो
है
उसे
वो
यार
बा-वफ़ा
न
सही
बे-वफ़ा
तो
है
Jameel Malik
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हम
को
यारों
ने
याद
भी
न
रखा
'जौन'
यारों
के
यार
थे
हम
तो
Jaun Elia
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पहले
रूठा
यार
मनाना
होता
है
फिर
कोई
त्योहार
मनाना
होता
है
Hasan Raqim
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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तनक़ीद
न
तक़रार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
हैरत
है
मेरे
यार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
गूँगों
को
तकल्लुक़
के
मवाक़े
हैं
मुयस्सर
हम
माहिर-ए-गुफ़्तार
बड़ी
देर
से
चुप
हैं
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Ahmad Abdullah
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बातें
दवा
का
काम
कर
सकतीं
हैं
यार
बीमार
से
तुम
बात
करके
देखना
Shubhangi kalii
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मशरूफ़
हो
गए
थे
यूँँ
दुनिया
की
शाम
में
तुमको
भुलाने
की
ज़रा
फ़ुर्सत
नहीं
मिली
"Nadeem khan' Kaavish"
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मैं
अब
मर
चुका
हूँ,
मुबारक
हो
सबको
ज़नाजा
मेरा
अब
उठाओ
तो
कोई
"Nadeem khan' Kaavish"
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जिन
आँखों
में
कुछ
सपने
थे
उन
आँखों
में
अब
पानी
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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अब
तक
समझ
न
पाया
मैं
आख़िर
कि
क्या
थे
तुम
पापा
मुझे
बताओ
तो
किसका
लिखा
थे
तुम
तुम
में
जो
बात
थी
वो
किसी
में
नहीं
मिली
इक
आदमी
की
शक्ल
में
जैसे
ख़ुदा
थे
तुम
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"Nadeem khan' Kaavish"
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नमाज़ें
पढ़
तो
लेते
हैं
दु'आ
करते
नहीं
हैं
हम
जो
हाल-ए-दिल
न
पढ़
पाए
तो
फिर
कैसा
ख़ुदा
है
वो
"Nadeem khan' Kaavish"
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