tan-e-tanha muqaabil ho raha hooñ main hazaaron se | तन-ए-तन्हा मुक़ाबिल हो रहा हूँ मैं हज़ारों से

  - Kaif Bhopali
तन-ए-तन्हामुक़ाबिलहोरहाहूँमैंहज़ारोंसे
हसीनोंसेरक़ीबोंसेग़मोंसेग़म-गुसारोंसे
उन्हेंमैंछीनकरलायाहूँकितनेदावेदारोंसे
शफ़क़सेचाँदनीरातोंसेफूलोंसेसितारोंसे
सुनेकोईतोअबभीरौशनीआवाज़देतीहै
पहाड़ोंसेगुफाओंसेबयाबानोंसेग़ारोंसे
हमारेदाग़-ए-दिलज़ख़्म-ए-जिगरकुछमिलते-जुलतेहैं
गुलोंसेगुल-रुख़ोंसेमह-वशोंसेमाह-पारोंसे
कभीहोतानहींमहसूसवोयूँँक़त्लकरतेहैं
निगाहोंसेकनखियोंसेअदाओंसेइशारोंसे
हमेशाएकप्यासीरूहकीआवाज़आतीहै
कुओंसेपनघटोंसेनद्दियोंसेआबशारोंसे
आएपरआएवोउन्हेंक्याक्याख़बरभेजी
लिफ़ाफ़ोंसेख़तोंसेदुखभरेपर्चोंसेतारोंसे
ज़मानेमेंकभीभीक़िस्मतेंबदलानहींकरतीं
उमीदोंसेभरोसोंसेदिलासोंसेसहारोंसे
वोदिनभीहाएक्यादिनथेजबअपनाभीतअ'ल्लुक़था
दशहरेसेदिवालीसेबसंतोंसेबहारोंसे
कभीपत्थरकेदिल'कैफ़'पिघलेहैंपिघलेंगे
मुनाजातोंसेफ़रियादोंसेचीख़ोंसेपुकारोंसे
  - Kaif Bhopali
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