मैं वो ज़िया भी किसी काम लाया करता था

  - Kabir Athar
मैंवोज़ियाभीकिसीकामलायाकरताथा
जिसेचराग़धुएँमेंउड़ायाकरताथा
औरअबतोमैंभीसर-ए-राहफेंकदेताहूँ
कभीमैंफूलनदीमेंबहाएाकरताथा
कहींमैंदेरसेपहुँचूँतोयादआताहै
कहींमैंवक़्तसेपहलेभीजायाकरताथा
बसइतनादख़्लथामेराख़ुदाकेकामोंमें
मैंमरतेलोगोंकीजानेबचायाकरताथा
मेरेसुपुर्दकिफ़ालतथीबे-ज़ुबानोंकी
मैंरिज़्क़इसलिएवाफ़िरकमायाकरताथा
येख़ुदमुझेभीबड़ीदेरमेंहुआमालूम
किकोईदुखमुझेअंदरसेखायाकरताथा
चराग़इसलिएसुनतेथेग़ौरसेमुझको
मैंरौशनीकोसलीक़ेसेगायाकरताथा
मैंउसकेइश्क़मेंपागलथाफिरभीदिलमेरा
मेरेख़लूसपरतोहमतलगायाकरताथा
कुछइसलिएभीज़ियादाथीरौशनीमेरी
किमैंचराग़नहींदिलजलायाकरताथा
मेरेवुजूदमेंजबभीघुटनसीहोतीथी
मैंघरकीछतपरकबूतरउड़ायाकरताथा
  - Kabir Athar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy