वक़्तकीदहलीज़परबैठेहैंजानेकेलिए
मुंतज़िरहैंमौतकेआरामपानेकेलिए
क्यालिखूँजोज़िंदगीअपनीकहानीकहगई
लफ़्ज़लाऊँमैंकहाँसेइसफ़सानेकेलिए
जोबनायाथाकभीवोघरबिखरकररहगया
हमतरसतेहीरहेउसआशियानेकेलिए
महफ़िल-ए-जाम-ओ-सुबूमेंअबकहाँवोरौनक़ें
अबकहाँअंदाज़-ए-साक़ीहैदिखानेकेलिए
ज़ेबदेताहीनहींहरबातपरयूँँरूठना
क्याकरेंजाएँगेफिरउनकोमनानेकेलिए
ज़िंदगीकीउलझनोंमेंहरकोईमसरूफ़है
'अश्क'किसकेपासबैठेंदिललगानेकेलिए