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'June' Sahab Barelvi
is qadar pyaar tu na kar mujhse
is qadar pyaar tu na kar mujhse | इस क़दर प्यार तू न कर मुझ सेे
- 'June' Sahab Barelvi
इस
क़दर
प्यार
तू
न
कर
मुझ
सेे
देखते
सब
हटा
नज़र
मुझ
सेे
सर
के
बल
जा
गिरा
था
वो
पत्थर
आके
टकराया
इस
क़दर
मुझ
सेे
दिल
में
ग़म
और
हँसी
है
होंठों
पर
सीख
कर
बैठे
हैं
हुनर
मुझ
सेे
तालियाँ
क्यूँँ
नहीं
बजीं
अब
तक
रह
गई
क्या
कोई
कसर
मुझ
सेे
'जून'
सबको
तो
दुख
बताता
है
कुछ
भी
कहता
नहीं
मगर
मुझ
सेे
- 'June' Sahab Barelvi
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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वो
दिल-नवाज़
है
लेकिन
नज़र-शनास
नहीं
मिरा
इलाज
मिरे
चारा-गर
के
पास
नहीं
Nasir Kazmi
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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न
कोई
बीन
बजाई
न
टोकरी
खोली
बस
एक
फोन
मिलाने
पे
साँप
बैठा
है
कोई
भी
लड़की
अकेली
नज़र
नहीं
आती
यहाँ
हर
एक
ख़जाने
पे
साँप
बैठा
है
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Muzdum Khan
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ले
दे
के
अपने
पास
फ़क़त
इक
नज़र
तो
है
क्यूँँ
देखें
ज़िंदगी
को
किसी
की
नज़र
से
हम
Sahir Ludhianvi
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बात
इतनी
सी
है
मेरे
हम
दम
तू
नज़र
आया
जब
जिधर
देखा
D Faiz Khan
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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जब
भी
उस
शोख़
लब-ए-लाल
की
लाली
देखूॅं
उस
की
हर
दीद
में
ईद
और
दिवाली
देखूॅं
'June' Sahab Barelvi
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चूम
के
होंठ
से
प्याले
हमने
ज़ख़्म
हैं
दिल
से
निकाले
हमने
दाव
पे
ख़ुद
को
लगाकर
फिर
से
जेब
के
सिक्के
उछाले
हमने
सब
सेे
हर
बात
मुसलसल
करके
खो
दिए
चाहने
वाले
हमने
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'June' Sahab Barelvi
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क्या
हसीनों
को
ही
मुयस्सर
है
कोई
देता
नहीं
गुलाब
मुझे
'June' Sahab Barelvi
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है
उसके
बाद
इस
दिल
का
वो
आलम
ये
दिल
है
अब
मेरा
बे-जान
कोई
'June' Sahab Barelvi
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दुश्मनों
के
ही
अब
सहारे
हैं
जंग
अपनों
से
ऐसी
हारे
हैं
मुझको
अच्छे
बुरे
का
इल्म
नहीं
ये
जो
मौजूद
हैं
पियारे
हैं
शक्ल-ओ-सूरत
न
तुम
मिरी
देखो
हम
तो
जैसे
भी
हैं
तुम्हारे
हैं
वसवसे
दिल
में
अब
मिरे
उठते
क्या
रक़ीबों
के
वारे
न्यारे
हैं
नज़रें
उसकी
हैं
मानो
हुस्न-ए-नज़र
बाँहें
बाँहें
नहीं
इदारे
हैं
मेरे
नज़दीक
और
नहीं
कोई
मसलन
उसके
ही
सब
नज़ारे
हैं
एक
मुद्दत
से
मुद्दई
है
जून
पाँव
तशवीश
ने
पसारे
हैं
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'June' Sahab Barelvi
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