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Jitendra "jeet"
fal khaane men jitna meetha hota haius par utne hi chaaqoo ke saa.e hain
fal khaane men jitna meetha hota haius par utne hi chaaqoo ke saa.e hain | फल खाने में जितना मीठा होता है
- Jitendra "jeet"
फल
खाने
में
जितना
मीठा
होता
है
उस
पर
उतने
ही
चाक़ू
के
साए
हैं
- Jitendra "jeet"
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बोलकर
के
गया
था
वो
जाते
हुए
अच्छा
लगता
हूँ
मैं
मुस्कुराते
हुए
छोड़
आया
हूँ
ख़ुशियाँ
में
जिसके
लिए
हँस
रहा
है
वो
मुझको
रुलाते
हुए
हो
मुयस्सर
मुझे
रोटी
दो
वक़्त
की
मैं
बहुत
थक
चुका
हूँ
कमाते
हुए
घाव
जो
दिख
रहे
हैं
मेरे
गालों
पर
हो
गए
रोज़
आँसू
बहाते
हुए
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Jitendra "jeet"
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तुमको
हमारी
याद
का
सदक़ा
नहीं
रहा
तबसे
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
रहा
महँगा
हुआ
है
सब
यहाँ
इक
जान
छोड़कर
कुछ
भी
हमारे
देश
में
सस्ता
नहीं
रहा
हमको
भी
हो
गई
है
मोहब्बत
किसी
से
फिर
वो
इश्क़
आख़िरी
भी
हमारा
नहीं
रहा
रो
रो
के
खो
गई
है
मेरी
आँख
की
नमी
अब
तो
हमारी
आँख
में
दरिया
नहीं
रहा
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Jitendra "jeet"
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सबको
जीने
का
यूँँ
ढब
नहीं
आएगा
आना
जब
चाहिए
तब
नहीं
आएगा
व्यर्थ
ही
जाएगा
राह
तकना
तेरा
जो
गया
सो
गया
अब
नहीं
आएगा
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Jitendra "jeet"
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आपका
इक
इसारा
बहुत
है
दरिया
का
इक
किनारा
बहुत
है
आसमाँ
के
सभी
तारे
उसके
चाँद
हो
बस
हमारा
बहुत
है
सोचता
हूँ
उसे
छोड़
तो
दूँ
यार
वो
शख़्स
प्यारा
बहुत
है
देखने
को
बहुत
कुछ
यहाँ
पर
यार
का
इकऑ
नजारा
बहुत
है
ख़ामुशी
ये
बयाँ
कर
रही
है
मैंने
तुझको
पुकारा
बहुत
है
इश्क़
मझधार
में
डूबते
को
तिनके
का
ही
सहारा
बहुत
है
जीत
ये
बाज़ी
हैं
उलझनों
की
फ़ाइदा
कम
ख़सारा
बहुत
है
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Jitendra "jeet"
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नहीं
जाना
कभी
हमने
सबक
क्या
आशिक़ी
देगी
दिखाकर
हिज़्र
की
रातें
बसल
के
गीत
गाती
है
Jitendra "jeet"
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