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Jitendra "jeet"
haal-e-dil tumne aisa banaya sanam
haal-e-dil tumne aisa banaya sanam | हाल-ए-दिल तुमने ऐसा बनाया सनम
- Jitendra "jeet"
हाल-ए-दिल
तुमने
ऐसा
बनाया
सनम
मुझको
दर-दर
पे
तुमने
घुमाया
सनम
- Jitendra "jeet"
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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ज़ब्त
का
ऐसे
इम्तिहान
न
ले
ऐ
मेरी
जान
मेरी
जान
न
ले
Khalid Sajjad
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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मेरी
ही
जान
के
दुश्मन
हैं
नसीहत
वाले
मुझ
को
समझाते
हैं
उन
को
नहीं
समझाते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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जान-लेवा
थीं
ख़्वाहिशें
वर्ना
वस्ल
से
इंतिज़ार
अच्छा
था
Jaun Elia
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पत्थर
के
ख़ुदा
पत्थर
के
सनम
पत्थर
के
ही
इंसाँ
पाए
हैं
तुम
शहर-ए-मोहब्बत
कहते
हो
हम
जान
बचा
कर
आए
हैं
Sudarshan Fakir
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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हर
घड़ी
हर
पहर
याद
आते
हो
तुम
फिर
यूँँ
तुम
को
भुलाने
से
क्या
फ़ाएदा
रंग
जीवन
के
ही
जब
ये
फीके
हुए
फिर
ये
होली
मनाने
से
क्या
फ़ाएदा
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Jitendra "jeet"
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कैसे
बिखरी
हुई
है
मेरी
ज़िंदगी
क्या
से
क्या
हो
गई
है
मेरी
ज़िंदगी
Jitendra "jeet"
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शायद
कोई
भूल
हुई
हम
से
भारी
सारे
दुख
मेरे
हिस्से
में
आए
हैं
तेरे
घर
ख़ुशियों
की
बारिश
होनी
है
मेरे
घर
में
ग़म
के
बादल
छाए
हैं
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Jitendra "jeet"
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ये
ख़ुदा
तू
तो
ये
जानता
है
कितने
तरसे
हैं
इक
शख़्स
को
हम
Jitendra "jeet"
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आपका
इक
इसारा
बहुत
है
दरिया
का
इक
किनारा
बहुत
है
आसमाँ
के
सभी
तारे
उसके
चाँद
हो
बस
हमारा
बहुत
है
सोचता
हूँ
उसे
छोड़
तो
दूँ
यार
वो
शख़्स
प्यारा
बहुत
है
देखने
को
बहुत
कुछ
यहाँ
पर
यार
का
इकऑ
नजारा
बहुत
है
ख़ामुशी
ये
बयाँ
कर
रही
है
मैंने
तुझको
पुकारा
बहुत
है
इश्क़
मझधार
में
डूबते
को
तिनके
का
ही
सहारा
बहुत
है
जीत
ये
बाज़ी
हैं
उलझनों
की
फ़ाइदा
कम
ख़सारा
बहुत
है
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Jitendra "jeet"
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