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Jitendra "jeet"
mar naa jaayen ham kahiin aankhoñ men paani chhodije
mar naa jaayen ham kahiin aankhoñ men paani chhodije | मर ना जाएँ हम कहीं आँखों में पानी छोड़िए
- Jitendra "jeet"
मर
ना
जाएँ
हम
कहीं
आँखों
में
पानी
छोड़िए
कैसे
टूटा
दिल
हमारा
वो
कहानी
छोड़िए
हमको
फूलों
की
कताएँ
रास
कब
ही
आईं
हैं
नागफनियाँ
ही
हमें
दो
रातरानी
छोड़िए
आओ
अब
हम
खो
चलें
इक
दूसरे
के
इश्क़
में
किस
सेे
क्या
वादे
किए
बातें
पुरानी
छोड़िए
गर
किसी
का
होना
चाहे
फिर
यहीं
पर
रुकिए
भी
कुछ
समय
के
ही
लिए
तो
ये
रवानी
छोड़िए
- Jitendra "jeet"
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उसने
तो
इक
हद
तक
जाना
था
मुझको
जिस
हद
में
रह
उसने
पाना
था
मुझको
मैं
तो
नादाँ
था
जानू
भी
तो
कैसे
तुम
को
तो
आकर
समझाना
था
मुझको
उसने
ही
तोड़ा
था
फिर
ये
दिल
मेरा
जिसने
इक
दिन
सब
कुछ
माना
था
मुझको
अंतिम
वादे
की
ख़ातिर
ज़िंदा
हूँ
मैं
पहले
वादे
में
मर
जाना
था
मुझको
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जो
नहीं
यार
था
हो
गया
है
ये
मिरे
साथ
क्या
हो
गया
है
और
कोई
नहीं
है
मिरा
अब
दर्द
से
वास्ता
हो
गया
है
है
बहुत
डर
मुझे
टूटने
का
दिल
मिरा
आइना
हो
गया
है
इश्क़
में
अब
सभी
हैं
गुज़रते
क्या
बदन
रास्ता
हो
गया
है
इश्क़
में
जीत
कर
फिर
मिला
क्या
यार
ही
जब
जुदा
हो
गया
है
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Jitendra "jeet"
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इक
घड़ी
में
हमें
वो
भुलाने
लगे
इस
तरह
होश
मेरे
ठिकाने
लगे
थामकर
हाथ
ग़ैरों
का
वो
चल
दिए
जिनको
पाने
में
हमको
ज़माने
लगे
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Jitendra "jeet"
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एक
पिता
ने
फिर
पगड़ी
की
ख़ातिर
शादी
कर
दी
उसकी
बेमर्ज़ी
से
Jitendra "jeet"
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सोचो
वो
कैसे
जीते
होंगे
जिनके
आशिक़
उनकी
बाँहों
में
मर
जाते
हैं
Jitendra "jeet"
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