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Jaun Elia
nahin dekhi hai shakal tak uski
nahin dekhi hai shakal tak uski | नहीं देखी है शकल तक उसकी
- Jaun Elia
नहीं
देखी
है
शकल
तक
उसकी
ख़्वाब
में
किसकी
शकल
देखूँ
मैं
- Jaun Elia
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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रो
रही
हूँ
कि
तुम
दिख
न
पाए
कहीं
हाए
ये
ख़्वाब
सिंदूर
है
माँग
में
Neeraj Neer
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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न
जी
भर
के
देखा
न
कुछ
बात
की
बड़ी
आरज़ू
थी
मुलाक़ात
की
Bashir Badr
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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बढ़
के
इम्कान
से
नुक़्सान
उठाए
हुए
हैं
हम
मुहब्बत
में
बहुत
नाम
कमाए
हुए
हैं
मेरे
मौला
मुझे
ता'बीर
की
दौलत
दे
दे
मैंने
इक
शख़्स
को
कुछ
ख़्वाब
दिखाए
हुए
हैं
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Ejaz Tawakkal Khan
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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इक
महक
सिम्त
ए
दिल
से
आई
थी
मैं
ये
समझा
तेरी
सवारी
है
Jaun Elia
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बात
ही
कब
किसी
की
मानी
है
अपनी
हठ
पूरी
कर
के
छोड़ोगी
ये
कलाई
ये
जिस्म
और
ये
कमर
तुम
सुराही
ज़रूर
तोड़ोगी
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Jaun Elia
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किस
लिए
देखती
हो
आईना
तुम
तो
ख़ुद
से
भी
ख़ूब-सूरत
हो
Jaun Elia
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घर
से
हम
घर
तलक
गए
होंगे
अपने
ही
आप
तक
गए
होंगे
हम
जो
अब
आदमी
हैं
पहले
कभी
जाम
होंगे
छलक
गए
होंगे
वो
भी
अब
हम
से
थक
गया
होगा
हम
भी
अब
उस
से
थक
गए
होंगे
शब
जो
हम
से
हुआ
मुआ'फ़
करो
नहीं
पी
थी
बहक
गए
होंगे
कितने
ही
लोग
हिर्स-ए-शोहरत
में
दार
पर
ख़ुद
लटक
गए
होंगे
शुक्र
है
इस
निगाह-ए-कम
का
मियाँ
पहले
ही
हम
खटक
गए
होंगे
हम
तो
अपनी
तलाश
में
अक्सर
अज़
समा-ता-समक
गए
होंगे
उस
का
लश्कर
जहां-त
हाँ
या'नी
हम
भी
बस
बे-कुमक
गए
होंगे
'जौन'
अल्लाह
और
ये
आलम
बीच
में
हम
अटक
गए
होंगे
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Jaun Elia
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मैं
तो
सफों
के
दरमियां
कब
से
पड़ा
हूँ
नीम
जाँ,
मेरे
तमाम
जाँ
निसार
मेरे
लिए
तो
मर
गए
Jaun Elia
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