guzar raha hai idhar se to muskurata ja | गुज़र रहा है इधर से तो मुस्कुराता जा

  - Jauhar Nizami
गुज़ररहाहैइधरसेतोमुस्कुराताजा
खिलेनहींहैंजोग़ुंचेउन्हेंखिलाताजा
तुझेक़समहैसुकूँ-आज़मानिगाहोंकी
किसीग़रीबकीतक़दीरकोजगाताजा
वहीनिगाहवहीइकतबस्सुम-ए-रंगीं
चराग़-ए-अंजुमन-ए-यासकोबुझाताजा
जुनूँ-नवाज़तिरीमस्त-गामियोंकेनिसार
कमंद-ए-होश-ओ-ख़िरदसेमुझेछुड़ाताजा
फ़रेब-ख़ुर्दा-ए-बज़्म-ए-हयातहूँया'नी
मिरीनिगाहसेअबयेहिजाबउठाताजा
उठाकेचेहरा-ए-रंगींसेपर्दा-ए-असरार
हरीम-ए-दिलकोफिरइकबारजगमगाताजा
  - Jauhar Nizami
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