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Javed Aslam
pyaas duniya ki bujh jaa.e is vaaste
pyaas duniya ki bujh jaa.e is vaaste | प्यास दुनिया की बुझ जाए इस वासते
- Javed Aslam
प्यास
दुनिया
की
बुझ
जाए
इस
वासते
धूप
में
एक
पर्बत
पिघलता
रहा
- Javed Aslam
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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रिश्तों
को
जब
धूप
दिखाई
जाती
है
सिगरेट
से
सिगरेट
सुलगाई
जाती
है
Ankit Gautam
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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हम
मुहब्बत
में
किसी
के
वास्ते
जी
नहीं
सकते
तो
मर
तो
सकते
हैं
Sunny Seher
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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हाथ
छूटें
भी
तो
रिश्ते
नहीं
छोड़ा
करते
वक़्त
की
शाख़
से
लम्हे
नहीं
तोड़ा
करते
Gulzar
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हम
नहा
लेंगे
सात
रंगों
में
आज
यादों
की
बारिशें
होंगी
Javed Aslam
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कुछ
ख़ुशियाँ
भी
मिल
जाएँगी
कुछ
सपने
भी
मिल
जाएँगे
यादों
की
मिटती
गलियों
में
कुछ
अपने
भी
मिल
जाएँगे
Javed Aslam
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ये
दुनिया
से
कब
कोई
क्या
ले
गया
अमल
ख़ुद
का,
सब
की
दु'आ
ले
गया
हुआ
ख़ुश
बहुत
पा
के
साहिल
मगर
जवानी
को
तूफ़ां
उड़ा
ले
गया
दबे
पाँव
आया
फ़रिश्ता
यहाँ
क़फ़स
से
परिन्दा
छुड़ा
ले
गया
जो
बैठा
हूँ
तन्हाई
के
साथ
मैं
न
जाने
मुझे
दिल
कुजा
ले
गया
हुनर
उस
का
ये
भी
कोई
कम
न
था
कि
ज़ख़्मों
को
अपने
छिपा
ले
गया
था
वीरां
मेरा
दिल
उसे
क्या
पता
ख़ज़ाना
समझ
कर
चुरा
ले
गया
बिखर
के
पड़ा
था
तू
'असलम'
यहाँ
जिसे
जो
मिला
वो
उठा
ले
गया
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Javed Aslam
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जो
भी
होना
था
हुआ
बिल-आख़िर
क्यूँ
किसी
से
हो
गिला
बिल-आख़िर
ख़ुद-पसंदी
का
भरम
टूट
गया
सब
समझते
हैं
बुरा
बिल-आख़िर
ग़म-गुसारी
से
था
परहेज़
मुझे
अब
अकेला
हूँ
पड़ा
बिल-आख़िर
आँधियों
में
जो
टिका
था
अब
तक
बिन
हवाओं
के
उड़ा
बिल-आख़िर
वक़्त
से
ज़र
तो
बनाया
लेकिन
वक़्त
सौदा
न
बना
बिल-आख़िर
किस
के
दामन
में
इसे
गिरना
है
अश्क
ढूँढे
है
पता
बिल-आख़िर
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Javed Aslam
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बाग़
जाता
रहा
बाग़बाँ
रह
गया
आग
बुझती
रही
बस
धुआँ
रह
गया
Javed Aslam
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