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Javed Aslam
khaar se kuchh gilaa nahin lekin
khaar se kuchh gilaa nahin lekin | ख़ार से कुछ गिला नहीं लेकिन
- Javed Aslam
ख़ार
से
कुछ
गिला
नहीं
लेकिन
फूल
चुभने
से
दर्द
होता
है
गर्म
होती
है
उनकी
बात
मगर
दिल
का
माहौल
सर्द
होता
है
- Javed Aslam
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तुम्हारे
बाद
इस
आँगन
में
फूल
खिलने
पर
ख़ुशी
हुई
भी
तो
ये
दुख
हुआ
कि
दें
किसको
Mohit Dixit
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उसकी
तरफ़
से
फूल
भी
आएँगे
एक
रोज़
पत्थर
उठा
के
चूम
ले
इसको
पहल
समझ
Munawwar Rana
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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किसी
कली
किसी
गुल
में
किसी
चमन
में
नहीं
वो
रंग
है
ही
नहीं
जो
तिरे
बदन
में
नहीं
Farhat Ehsaas
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पत्ता
पत्ता
बूटा
बूटा
हाल
हमारा
जाने
है
जाने
न
जाने
गुल
ही
न
जाने
बाग़
तो
सारा
जाने
है
Meer Taqi Meer
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यूँँ
ही
हमेशा
उलझती
रही
है
ज़ुल्म
से
ख़ल्क़
न
उनकी
रस्म
नई
है,
न
अपनी
रीत
नई
यूँँ
ही
हमेशा
खिलाए
हैं
हमने
आग
में
फूल
न
उनकी
हार
नई
है,
न
अपनी
जीत
नई
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Faiz Ahmad Faiz
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वैसे
तो
ज़ेवरों
की
ज़रूरत
नहीं
तुझे
फिर
भी
अगर
ये
फूल
तेरे
काम
आ
सके
Charagh Sharma
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घर
हमारी
वजह
से
कई
बस
गए
मेरे
हिस्से
में
ख़ाली
मकाँ
रह
गया
Javed Aslam
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लड़कपन
में
यहाँ
हर
चीज़
लामह़दूद
लगती
थी
बड़े
हो
कर
हुआ
इह़सास
दुनिया
कितनी
छोटी
है
Javed Aslam
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रूहें
तन्हा
कहाँ
निकलती
हैं
हसरतें
साथ
इन
के
चलती
हैं
आहटें
सोने
ही
नहीं
देतीं
यादें
छत
पर
मेरी
टहलती
हैं
तुम
चले
आओ
भी
तो
क्या
होगा
मुझ
से
ख़ुशियाँ
कहाँ
सँभलती
हैं
हक़
पर
बातिल
की
जीत
होती
है
नफ़रतें
प्यार
को
कुचलती
हैं
फ़ानी
दुनिया
में
फल
नहीं
मिलता
नेकियाँ
जन्नतों
में
फलती
हैं
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Javed Aslam
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लकीर-ए-इख़्तितामी
का
पता
मा'लूम
किसको
है
अजब
सी
दौड़
है
उनको
कहाँ
जाने
की
जल्दी
है
Javed Aslam
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छोड़
आए
थे
कूचे
जो
बचपन
में
हम
जिस्म
तो
है
यहाँ
दिल
वहाँ
रह
गया
Javed Aslam
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