kaisa abr hai jis ke barsne ki | कैसा अब्र है जिस के बरसने की

  - Janan Malik
कैसाअब्रहैजिसकेबरसनेकी
हरपलउम्मीदलिए
आँखेंतिश्ना-लबरहतीहैं
उसकोदेखके
येकिश्त-ए-बारानीभरतीहै
येजन्मोंकीप्यासहोजैसेइसमिट्टीकी
एकइकबूँदउतरतीमुझसेबातेंकरतीहै
पहलेमैंबारिशकोदेखकेख़ुशहोतीथी
अबमैंइसमेंभीगकेइसकीबातेंसुनतीहूँ
  - Janan Malik
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