"कौनसमझेगाइसपहेलीको"
म्यूनिख़मेंआजक्रिसमसहै
सारेमनाज़िरनेसफ़ेदचादरओढ़रखीहै
कमरेकीखिड़कीसेआतीउदासीचहार-सूफैलतीजारहीहै
अँधेराउदासियोंकेनौहेपढ़रहाहै
मुमटियोंसेफिसलतानहींकोईकंकर
लम्हेसाकितहोगएहैं
अलमारीकेख़ानोंमेंकुछयादेंबिखरीपड़ीहैं
सामनेपड़ीकुर्सीझूलरहीहै
सारामाहौलसोगवारहै
अजीबसाडरहै
जोआँसूबनकरउतररहाहै
आसमाँसातरंगरौशनियाँ
क़हक़हेसाज़नग़्मगी
येहुजूमसाल-हा-सालकीमसाफ़तहै
केंचुलीबदलनेकाएहसास
आँखोंकीख़ामोशीसेअथाहगहराईमेंउतररहाहै
मैंअभीलौटकरनहींआई
दिलनेबरसोंसेरू-ए-आलमकीख़ाकछानीहै
तेरीअंखोंमेंकहींवोज़मानेसिमटकेआगएहैं
जबकोएटाएयरपोर्टसेनम-नाकीनेतुम्हेंरवानाकिया
रक़्सनग़्मगी
चूड़ियोंकीखनककेनीचेहैं
भारीहैइनसबसाज़ोंसे
हाथख़ालीहैंदिलवीरानहै
दायरादायरायेख़ामोशी
दायरादायरायेतन्हाई
जिसमेंक़दीमआसार
मोहन-जोदाड़ोहड़प्पाबाबिलटेक्सलाके
जोमेरेअंदरलम्हालम्हाउतरतेजातेहैं
मजीदअमजद
मैंफ़ासलोंकीकमंदकीअसीर
मैंतेरीशालात
रूद-बारकेपुलपरबड़ीदेरसेखड़ीहूँ