zaat ki aasoodagi ke sab jatan karta rahoon | ज़ात की आसूदगी के सब जतन करता रहूँ

  - Jamshed Afaq
ज़ातकीआसूदगीकेसबजतनकरतारहूँ
ताएरोंकेसंगउड़कर
आसमाँकीझिलमिलातीनीलगूँसीगोदमेंइख़्लासकीगर्मी
मोहब्बतकीतपिशको
हरघड़ीमैंढूँढताफिरतारहूँ
याकभीअपनेख़यालोंकीरिदाओढ़े
मैंधरतीकेखुलेसीनेपेसररखकर
औरअपनीबाँहेंउसकेगर्दलिपटानेकीकोशिशमें
जहाँभरकेगिले-शिकवेघनेबालोंमें
आँखोंसेछिनेमोतीसमझकेडालताजायाकरूँँ
याकभीमैंना-रसाईकेसमुंदरमें
किसीछोटीसीमछलीकीतरह
अपनेतहफ़्फ़ुज़औरअपनीज़िंदगानीको
ख़ुशीकेख़ूब-सूरतआसमानीसातरंगोंके
किसीनादीदासाँचेमें
बदलदेनेकाऐसामक्र-ओ-फ़नकरतारहूँ
ज़ातकीआसूदगीकेसबजतनकरतारहूँ
  - Jamshed Afaq
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