नहीं कि हम ने कभी हाल-ए-सोज़-ए-जाँ न कहा

  - Jamiluddin Aali
नहींकिहमनेकभीहाल-ए-सोज़-ए-जाँकहा
मगरब-हीला-ए-आराइश-ए-बयाँकहा
कोईख़ताहुईजिसकीयेमिलेपादाश
मगरयहीकिज़मीनोंकोआसमाँकहा
जिसअंजुमनसेहुआक़िस्सा-ए-जुनूँआग़ाज़
वहींकभीकहागोकहाँकहाँकहा
येएहतिराम-ए-तअ'ल्लुक़येएहतियाततोदेख
किज़िंदगीकोकभीहमनेराएगाँकहा
तिरेकरमकोकरमहीकहासितमकोसितम
ज़हेख़ुलूस-ए-तमन्नाकिइम्तिहाँकहा
हज़ारख़ुश्करहाअपनीज़िंदगीकाचमन
तिरीबहारकोलेकिनकभीख़िज़ाँकहा
हमेंभीनुदरत-ए-उस्लूबथीअज़ीज़मगर
उन्हेंजहाँहीपुकाराग़म-ए-जहाँकहा
  - Jamiluddin Aali
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