नहींकिहमनेकभीहाल-ए-सोज़-ए-जाँनकहा
मगरब-हीला-ए-आराइश-ए-बयाँनकहा
कोईख़तानहुईजिसकीयेमिलेपादाश
मगरयहीकिज़मीनोंकोआसमाँनकहा
जिसअंजुमनसेहुआक़िस्सा-ए-जुनूँआग़ाज़
वहींकभीनकहागोकहाँकहाँनकहा
येएहतिराम-ए-तअ'ल्लुक़येएहतियाततोदेख
किज़िंदगीकोकभीहमनेराएगाँनकहा
तिरेकरमकोकरमहीकहासितमकोसितम
ज़हेख़ुलूस-ए-तमन्नाकिइम्तिहाँनकहा
हज़ारख़ुश्करहाअपनीज़िंदगीकाचमन
तिरीबहारकोलेकिनकभीख़िज़ाँनकहा
हमेंभीनुदरत-ए-उस्लूबथीअज़ीज़मगर
उन्हेंजहाँहीपुकाराग़म-ए-जहाँनकहा