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Jagat Singh
udaasi naarazgi taghaaful teraa ha
udaasi naarazgi taghaaful teraa ha | उदासी नाराज़गी तग़ाफ़ुल तेरा, हमें छोड़ जाना तेरा
- Jagat Singh
उदासी
नाराज़गी
तग़ाफ़ुल
तेरा,
हमें
छोड़
जाना
तेरा
ज़रा
ज़रा
बूंद
बूंद
से
मेरा
ग़म
तो
सागर
ही
बन
गया
है
- Jagat Singh
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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रोऊँ
भी
तो
मैं
फिर
किसके
अब
सामने
ऐसे
फिर
अच्छा
भी
तो
नहीं
लगता
है
Jagat Singh
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देखो
ये
आसमाँ
आज
कुछ
ज़्यादा
ही
सूना
है
सिर्फ़
तारों
से
कितनी
ही
फिर
रौशनी
होती
है
Jagat Singh
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मेरी
अर्थी
के
पीछे
पढ़ोगे
जो
तुम
नज़्म
वो
भी
बना
कर
गया
है
जगत
Jagat Singh
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जान
जाती
है
मेरी
गर
जान
जाती
जान
मेरी
तो
न
मेरी
जान
जाती
फिर
न
मेरी
जान
जाती
Jagat Singh
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हाँ
'इज़्ज़त-आबरू
की
तेरे
शामत
आने
वाली
है
किए
पर
दीन
की
तेरे
बग़ावत
आने
वाली
है
Jagat Singh
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