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Jagat Singh
jitne bhi din guzaare hain har din likha hai she'r ik
jitne bhi din guzaare hain har din likha hai she'r ik | जितने भी दिन गुज़ारे हैं हर दिन लिखा है शे'र इक
- Jagat Singh
जितने
भी
दिन
गुज़ारे
हैं
हर
दिन
लिखा
है
शे'र
इक
कुछ
इस
तरह
ही
मैंने
हर
दिन
अपना
ग़म
बता
दिया
- Jagat Singh
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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पुराने
घाव
पर
नाखून
उसका
लग
गया
वरना
गुज़र
कर
दर्द
ये
हद
से
दवा
होने
ही
वाला
था
Atul K Rai
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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तेरे
वालिदैन
की
थकन
मिटाने
के
लिए
मेरे
बच्चे
तेरा
प्यारा
सा
ये
चेहरा
काफ़ी
है
Jagat Singh
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आप
आओ
सामने
यां
ख़्वाब
में
मेरे
कभी
ये
भी
तोहफ़ा
है
जुदाई
में
तो
वो
भी
तोहफ़ा
है
Jagat Singh
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नहीं
मनाया
जाएगा
वो
नख़रे
बाज़
अब
मुझ
सेे
मैं
मर
भी
गर
गया
ना
तो
वो
भी
ज़िया
जाएगा
Jagat Singh
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तेरी
बेरुखी
के
सबब
एक
डर
है
किसी
दिन
नज़र
भी
न
आया
तू
तो
फिर
Jagat Singh
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चाहिए
पल
क़यामत
के
आने
को
बस
कौनसे
कल
की
तुम
बात
करते
हो
फिर
Jagat Singh
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